शब्द-भंडार
तत्सम और तद्भव शब्द
संस्कृत से जैसे के तैसे आए शब्दों को उनसे बदलकर आए रूपों से अलग करो, जोड़े मिलाओ, और पहचानो कि बदलाव किस तरह का हुआ है।
हिंदी के बहुत से शब्द संस्कृत से आए हैं। कुछ जैसे के तैसे चले आए — 'अग्नि', 'हस्त', 'सूर्य'। कुछ लोगों की बोली में घिसते-घिसते बदल गए — वही 'अग्नि' 'आग' हो गया, 'हस्त' 'हाथ' और 'सूर्य' 'सूरज'। जो संस्कृत से बिना बदले आए वे तत्सम हैं, और जो बदलकर आए वे तद्भव।
नाम में ही अर्थ है
'तत्सम' का विच्छेद है तत् + सम — 'उसके समान', यानी संस्कृत रूप के बराबर। 'तद्भव' का विच्छेद है तत् + भव — 'उससे उत्पन्न', यानी संस्कृत रूप से जन्मा हुआ। नाम याद रहे तो भेद भूलना कठिन है।
बदलाव कुछ पहचाने-पहचाने रास्तों से होता है
जुड़े हुए व्यंजन खुल जाते हैं — क्षेत्र से खेत, स्वप्न से सपना। बीच का वर्ण गिर जाता है — मुख से मुँह, पत्र से पत्ता। कोई वर्ण दूसरे में बदल जाता है — कर्ण से कान, वत्स से बछड़ा। और अक्सर भीतर का कोई स्वर लंबा हो जाता है — दुग्ध से दूध, अश्रु से आँसू।
पहचानने की एक आसान परख
तत्सम शब्द अक्सर भारी लगते हैं और उनमें जुड़े व्यंजन, ऋ की मात्रा या विसर्ग मिलते हैं — गृह, कृषि, दुःख। तद्भव शब्द रोज़ की बोली के हल्के शब्द होते हैं और उनमें ये सब कम मिलते हैं — घर, खेती, दुख। परख पक्की नहीं है, पर शुरुआत में काम आती है।
Worked example
'अक्षि' और 'आँख' का नाता खोलकर देखो।
पहले पूछो कि दोनों में संस्कृत रूप कौन-सा है। 'अक्षि' में जुड़ा व्यंजन 'क्ष' है, इसलिए वही तत्सम है।
जुड़े व्यंजन बोलने में कठिन होते हैं, और लोगों की बोली कठिन ध्वनि को हमेशा आसान करती चलती है — इसलिए तत्सम ही पहले आता है।
Try it together
अब तीन जोड़े मिलकर मिलाते हैं।
हर बार एक शब्द या एक भेद का नाम पूछा जाएगा। शब्द पूरा और उसी रूप में लिखो।
1.'ग्राम' का तद्भव रूप लिखो।
Have a go
'हस्त' का तद्भव रूप कौन-सा है?
Ready to practise?
Eight questions on what you have just read. Nothing is timed, and you can play as many times as you like.